तडप

ऐसी शिरकत की इस मजमे में कि,
सदियाँ बीत गयीं चराग-ए-इश्क बुझाने में,
ऐसा सैलाब उमडा तकदीर का,
कि कोई बता न सका कितनी देर लगेगी उसको आने में,

अब तो रूह तडपती है बेहिसाब, कि चैन नहीं आता।।

एक त्रिवेणी
(कृतेः १३॰०७॰२००६)

आवाज

रात बीती, चलो भुला दें।

कौन अपना और कौन पराया
यह भेद आज मैं समझ न पाया,
पलकें खा गईं धोखा न जाने कैसे आज
दिल की खामोशियों को मैं परख न पाया।
इन खामोशियों को थोडी आवाज दिला दें,
रात बीती, चलो भुला दें।

सागर की लहरों को तुम तूफान समझ सकते हो
सुन चुका मैं, अब चला, ये मेरे प्यार की पुकार है,
गरज रही हुँकार सी बादल से मत भाग मेरे मन
ये मेरे दोस्त की मेरे लिए छेडी हुई मल्हार है।
ओछे शब्दों को थोडी सी जज्बात सिखा दें,
रात बीती, चलो भुला दें।

आशिकाना माहौल है, वक्त बेमिसाल है,
सारे किताबों में लिख देंगे हम कुछ नगमें,
कुछ यादों के, कुछ प्यार की, कुछ तेरे लिये, कुछ अपने तकरार की
तेरे सदके सब हैं कुर्बान, जमाना बस इससे है सहमे।
चल, जमाने को थोडी सी औकात दिखा दें,
रात बीती, चलो भुला दें।

(कृतेः २३॰४॰२००५)

Two Drops of Tear

I felt
just two drops of tear
striking on my mind.
My mind shouted
that the sky is leaking.
My heart
whispered slowly,
the drops never fall,
they rise from the two eyes of God.

I was thinking
perhaps the sky is the face of God,
and we often supposed
when drops fall
on our minds and souls.
Our mind overlooked the soul of the drops
and shouted
the sky is leaking.
We often couldn't find the souls,
and the spirits, but always the faces,
and the sky, but the God.

We always laughed when God cried
and declared the sky was laughing.
We always laughed when people were weeping
since we looked on thy faces
who hiding the tears
letting us feel the drops of water
and not the tears.

We overlooked
thy souls, and thy spirits,
thy loves, and thy lives.
We felt
the two drops of water,
falling,
on our minds
not on our souls.

(penned down @ 22.05.2004)

Hope

It's raining
through the clouds,
and also through some eyes.

Nature
is flourishing
the whole world,
but some still wait for the moment
when they will be
cherished
by the ones.

Alone,
away from all,
surrounded by clouds,
walking though fogs,
covered from darks,
searching for the light,
and hoping for friends.

A grand festival of life
is about to begin.

Shall thy come?

(penned down @ 14.07.2004)

अनुभव

कुछ सपने हैं, कुछ इरादे हैं,
कुछ चाहत है, कुछ वादे हैं।

कई सपने थे, जो चकनाचूर कर दिये गए
कई इरादे थे, जिनपर पानी फेर दिये गए
कई चाहत थे, चाहनेवाले ही छिड गए
कई वादे थे, जो अपनों के द्वारा ही तोडे गये।

कहते थे कि यहाँ ठँढी हवा बहती है
मैं गुजरा तो तूफान से सामना हुआ,
कहते थे कि यहाँ प्रेम की बारिश होती है
मौसम खराब हो गई है, अब यहाँ ओले बरसते हैं।

मैंने सुना था कि सबलोग यहाँ सीधे-सादे हैं
ऐसा क्यूँ लगता है कि सच्चाई का बोझ खुद पर लादे हैं,
मैंने पूछा कि आधे-अधूरे जीवन से क्या फायदा
आवाज आई के हम क्या करें, हम तो बस प्यादे हैं।

मल्हार की घडियों में जलधार कब आते हैं
सावन के मौसम में घर-बार भूल जाते हैं,
जीने वालों के अधिकार छिनते नजर आये
मौत से लडने वाले जिन्दगी से ही हार जाते हैं।

अब कहते हो कि वापस मुड जाओ
धरती पर रेंगते कीडों के कारवाँ में तुम भी जुड जाओ,
पर जीने वालों को कौन रोक सकेगा
वे तो फैलेंगे ही, भले ही सारा संसार सिकुड जाये।

अब सपने हैं आसमान को छेदने की, पत्थर मिले या न मिले
लहरों को चीरने की इरादें हैं, माँझी की परवाह कौन करे
खुशियों की बारिश करने की चाहत है, देखता हूँ कब तक आँसू बरसाओगे
अब मेरे वादे हीरों से मजबूत लगते हैं, तोडने वाले खुद ही टूट जायेंगे।

हम तो इंतजार करेंगे कयामत के बाद भी
जीने वाले जिन्दगी की परवाह कब करते हैं,
हम बिखर गये तो जमाना कौन बुहारेगा
अब मेरे आशियाँ में फजाओं के दरवाजे हैं।

क्योंकि, कुछ सपने हैं, कुछ इरादे हैं,
फिर, कुछ चाहत हैं, कुछ वादे हैं।

(कृतेः १४॰१२॰२००३)

पलछिन

युगों से कई रातों को देखता आया हूँ
पर इस रात कि बात ही कुछ और है,
इन सदियों में कितने लोगों से जुड चुका हूँ मैं
पर इस मुलाकात की बात ही कुछ और है।

कई पलछिनों को बटोर कर ये नाता बुना था
इन रिश्तों के पल जैसे छिन गये थे मुझसे,
गूँचे देखे, प्यार देखे, फूल देखे, बहार देखे
पर साथी तेरे साथ की बात ही कुछ और है।

इस रात की राह तकते हुये लोग थक से गये थे
इन राहों के राह में खुशबू की ओस बिछाई है,
इन शहरों में कितनी बारिशों में खुद को भींगा पाया है मैनें
फिर भींग रहा हूँ, पर प्रेम के इस बरसात की बात ही कुछ ही और है।

कई नजराने लुट गये, कितने फसाने जुट गये
इस पल की चाहत में जैसे कितने जमाने मिट गये,
जीवन को जनाजे समझनेवालों, जरा झाँक कर देखो
इन यादों की बारात की बात ही कुछ ही और है।

(कृतेः ६॰१०॰२००३)

Forget them not

O my luvs,
you are as changeable as the moon,
but I learned to get vanished for the one.

O my foes,
you are as straight as an arrow.
But I sought to longe for the other.

O my woes,
you are as graceful as a swan,
you taught me to find the stubborn facets of my life.

O my bliss,
you are as yielding as the wax,
and I forgot the darkness with your twinkling presence.

I cant forget thy all, thou you always lose sight of me,
coz, you let me to carry my thoughts back.

(penned down @ 22.07.2003)

Revolution

Resolution, resolution, resolution
But why didn't we ever bring a revolution,
why we never look like intrepid.
We begin from an imbroglio,
waxed in and now we want be finished in imbroglio.

Are we unwilling to find a way?
No,
paths are ahead of us.
The sun never stopped shining,
but our eyes have been closed.
The freesom of sky is moving around
and we can fly to the stars.
But we don't have courage to let ourselves
in the splendid,
perpetual unkown.
We don't know the experience of joy
that the unknown brings,
the greatest ecstacy that is swimming around.

Haa, we are waiting
to be nailed by the time before the doors
Shall the time arrive
when we have to move along the time.
And yes, it is a time to
take a chance,
a charge, a control,
not taking care of the being.
taking the cares shall
let us to enter
in nowhere....

(penned down @ 22.06.2003)

सफर

जिन्दगी का सफर जब लंबा लगने लगे
पैरों के नीचे काँटों का बिस्तर चुभने लगे,
सूरज की किरणें जब अग्नि बरसाएँ
और रास्ते पर जब पत्थर नहीं पर्वत अडने लगे।

तब भी मुसाफिर हार नहीं मानना
क्योंकि रुकने का मतलब जीवन को रोकना है,
जिन्दगी तुझे हारने को नहीं दी गई
राही, तुझे मुस्कुराते हुये बस चलते ही जाना है।

इस सफर में सब तेरे सहयात्री हैं
पर तुझे इनसे कोई सरोकार नहीं,
तुम्हें इनके सहारे सफर नहीं तय करना है
और जिन्दगी कभी सहयात्रियों की मोहताज नहीं।

इनमें से कुछ तुम्हें भटकायेंगे
कुछ तुझे बातों मे अटकायेंगे,
कुछ तेरे सफर को आसान भी बनायेंगे
और जब तक जीवित रहें तेरा साथ निभायेंगे।

मँजिलें पहले बनाई जाती हैं
रास्ते बाद में मिलते जायेंगे,
जिन्दगी के सफर को तुझे खुद ही तय करना है
तो ये सहयात्री तुझे मँजिल तक कैसे पहुँचायेंगे।

तू सामने की दूरी से क्यों घबराता है
पीछे कितने मील के पत्थर छोड आया है तू,
जो बैठ गए उनकी बातों को क्यों सुनता है
मुडके देख, सुनकर कितनी बार पछताया है तू।

तुझे इस सफर में रूकना नहीं
बल्कि राह पर रोते हुओं कि हँसाना है,
और तुझे इस जिन्दगी को जीते हुए,
मुसाफिर बस चलते ही जाना है।

(कृतेः २३॰७॰२००३)

मेरा कोई नहीं

अपने दिल का हाल मैं किसे सुनाऊँ, मेरा कोई नहीं
हाल दुःखों का किसे बताऊँ, मेरा कोई नहीं।
मेरा दिल टुटा तो क्या हुआ, कितने दिल यहाँ टूटे होंगे,

साथ सब छोडें तो गम हो क्यों, कितने प्यार यहाँ लूटे होंगे,
तू दर्द मेरा समझेगा कैसे, मेरे लिये तू तडपेगा कैसे,
मेरी आवाज तू कैसे पहचाने, मेरा कोई नहीं।

जीवन का सफर तय करना है खुद ही, साथी क्यों ढूँढते फिरूँ,
रात को आना ही है, आएगा, दिन की बाट क्यों जोहते फिरूँ,
सूरज भी तो बढता अकेला, नदियाँ राह खोजती हैं खुद ही,
मेरा साथ कोई देगा क्यों, साथ किसी ने कभी दिया है क्या,
साये भी साथ छोडें अँधेरों में, कोई दूसरा साथ कैसे रहेगा,
मेरे दिल तू क्यों न समझे, मेरा कोई नहीं।

(कृतेः ९॰७॰२००३)

ख्वाब

रात्रि की चौथी पहर में,
एक ख्वाब देखा है मैनें।
जिन्दगी कि किताब में जैसे,
बुझता हुआ चिराग देखा है मैनें।
अँधेरों की बारात अपने शवाब पर थीं,
खुशियों के जनाजे का सौगात देखा है मैनें।
प्रियजनों से बिछाव का दुःख नहीं था मुझको,
दोस्तों को अब सामने से करते हुए घात देखा है मैनें।

आँखें खुलीं तो खबर मिला स्वप्न था सब,
जानकर खुशी हुई कि झूठा ख्वाब देखा है मैनें।
उमँग की किरणें सामने आलिंगन कर रहीं थीं,
चारों ओर से होते प्रेम का बरसात देखा है मैनें।
ख्वाब के बाहर रौशन है शहरे-मुहब्बत,
बीते हुये बातों का औकात देखा है मैनें।

(कृतेः १॰१॰२००३)

तुम्हारी याद

शहर से सहर तक
युगों की डगर तक
जीवन की सफर से,
दुखों की कहर तक
प्रिये,
मैनें नहीं भूली तुम्हारी याद
जबकि तुम थे बेखबर मुझसे
कदाचित् हम दूर नहीं थे तुझसे।

लेकिन प्रिये,
इस सुनहली रेत पर,
चमकती धूप में भी
नहीं आ रही तुम्हारी छाया भी।
अन्धेरे ख्वाबों में,
यादों के आईने में,
नहीं दिखती तुम्हारी काया भी।
अकेलेपन के सिलसिले खत्म नहीं होते,
बहते हुये आँसू अब जब्त नहीं होते,
मुझे नहीं है तुमसे कोई शिकायत।

किन्तु मेरे प्रिये,
मेरे जीवन की रोशनी,
हूँ मैं तुम्हारे साथ सदैव,
कंपकंपाते तुषारों के तले,
सागर किनारे शांत क्षितिज के नीचे,
रेतीली गर्म हवा में जलते हुये भी
जेठ की दुपहरी में,
पतझड के शजरों के तले।

(कृतेः ०४॰१०॰२००२)

कौन है वो

मैं नहीं जानता कौन है वो,
जिसके लिये मेरीं धडकनें धडक रही हैं
साँसें लेता हूँ मैं जिनके लिये,
जी रहा हूँ मैं किसके लिये,
मैं नहीं जानता कौन है वो।

सपने देखता हूँ मैं हर रोज,
पर वो मेरे स्वप्नों में नहीं आते,
उनके आगमन के लिये सदियों से तरसा रहा हूँ मैं,
जो मेरे दिल में प्यार की कलियाँ खिला दें।
यह चाँद जिसकी मधुरिमा,
पूरे सँसार में प्यार की किरणें बिखेरती हैं
सारे टूटे हुये दिलों में,
प्यार के रस घोल देतीं हैं,
मैं सोचता रहा हूँ हमेशा,
कि क्या मेरे दिल में बसी खामोशियों को
कभी कोई मीठी सी आवाज मिलेगी
सारे जहाँ से ठुकराये हुये इस दिल में
क्या कभी मिठास भरेगा?

कितना प्यार है चाँद को चाँदनी से,
सुबह को ओस से, पर्वत को झरने से,
कलियों कि खुशबू से, तितलियों को फूलों से,
रात्रि को सन्नाटे से, दिन को उजाले से,
सागर को लहरों से, नयनों को सपनों से,
क्या ऎसा प्रेम मेरे जीवन में आयेगा
और इस जीवन में फिर से जीने की चाहत बढायेगा?

यह अँधेरे की चादर जो,
मेरे जीवन के स्वप्न पर छाते जा रही है।
मैं गुमनाम चेहरों में
खामोश होकर पहचान माँग रहा हूँ,
मेरे स्वप्न बादलों के महल में खोते जा रहे हैं,
ओस सी शीतल और कोमल मेरे भावों को,
सुबह की किरणें कुचलती जा रहीं हैं।
सत्य से अटल मेरे प्रेम के लिए,
इस झूठी दुनिया में कोई जगह नहीं,
मगर यह दिल अभी भी इंतजार कर रहा है।

केंचुए सा सुप्त मेरा प्रेम,
इसे काट कर कितने भी टुकडे कर दो,
मरेगी नहीं,
हर टुकडा केंचुए सा,
जिन्दगी की साँस बनकर,
मेरे आँखों की प्यास लेकर,
पुनः विस्तृत हो जायेगा।

क्योंकि,
मैं अभी भी आशा में हूँ उसके,
मुझे अभी भी इंतजार है उसका,
पर ये भी एक सच है कि
मैं अब भी ये नहीं जानता,
कौन है वो?

(कृतेः ०७॰२००२)

इच्छा

ये सूनापन कैसे भरूँ
कैसे भरूँ वो सूखी हुई सरिता
ताकि सागर सूख न जाये
कैसे भरूँ वो खाली कोना दिल का
कैसे भरूँ वो टूटे हुये संबंध
जो शुरू होने से पहले खत्म हो गये।

कैसे रोकूँ वो शजरों का कटना
ताकि फिजाँ सहरा न बन जाये
कैसे रोकूँ तूफान का बहना
ताकि चरागे-इश्क बुझ न जाये
कैसे रोकूँ उन्हें जो चले जा रहे
ताकि ये मंजर मुनव्वर रहे।

ऐ खुदा, सुन ले ये इल्तजा
भर दो ये सुनापन, ये टूटे हुये संबंध,
रोक दो ये बहना तूफान का
ताकि जहनो-दिल रौशन रहे
ताकि जब आये प्यास, तो सरिता नजदीक रहे
ताकि जब दर्शन की इच्छा हो,
तो आईना पहलू में रहे।

(कृतिः १०/१९९९)

जीवन

आकाश के पँक्षी को देखो
वे
न बोते हैँ
न बुनते हैँ
और
न घोसलों में
जमा करते हैं
फिर भी
ईश्वर उन्हें खिलाता है।

जीवन क्या
भोजन से बढकर नहीं है?

सारी धरती तुम्हारी है
फिर
उसपे रहनेवालों में
भेद क्यों?

(कृतिः ७/१९९९)

विश्वास

किसी भीषण
सूखे से आक्राँत
बँजर जमीन के सद्रिश्य
चटखता जा रहा है
मेरा ह्रिदय

काश
तुम घटा बनकर
मेरे जीवन मेँ आती
और
इस शुष्क ह्रिदय मेँ
यह विश्वास
पुनः जगा पाती
कि
बसंत आज भी
निहित है मुझमें ।

(कृतिः ४/१९९९)

जागृति

जागे हैं, अब सारे, लोग तेरे, देख वतन,
गूँजे हैं, नारों से, अब ये जमीं और गगन.

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